🧾 प्रारंभिक जीवन (Early Life) बाबा महतो साहेब बचपन से ही अत्यंत तेज, समझदार, फुर्तीले एवं मानवतावादी विचारों वाले थे। उन्होंने अपने जीवन के प्रारंभिक चरण में ही कर्मकांड और आडंबरवाद का दृढ़ता से विरोध किया। वे यज्ञों में दी जाने वाली पशुबलि के भी विरोधी थे और शांति तथा अहिंसा के प्रबल समर्थक थे। इसी कारण उन्हें समाज में विशेष ख्याति प्राप्त हुई। बाबा महतो साहेब ने कर्मकांड के स्थान पर ज्ञान और साधना को अधिक महत्व दिया। उन्होंने पशुबलि को गलत बताते हुए अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्होंने “जियो और जीने दो” का सिद्धांत दिया। ज्ञान और शांति की प्राप्ति के लिए वे निरंतर भ्रमण करते रहते थे। उस समय परनावां गांव घने जंगलों से घिरा हुआ था। वहां एक टीले के उत्तर में धनायन नदी और पश्चिम में सकरी नदी बहती थी। बाबा महतो साहेब इसी स्थान पर रुकते थे। उन्होंने वहां जंगल और झाड़ियों को साफ कर एक कुटिया का निर्माण किया, जिसका नाम “प्रणव कुटिया” रखा। इस कुटिया में उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की। इस दौरान वे केवल करमी का साग ख...